अपडेट: 18 अक्टूबर 2026 · लेखक: अशोक सचदेव
Quick answer
दुकान का रोज़ का प्रॉफ़िट-लॉस निकालने के लिए: आज की कुल बिक्री (नकद, UPI, कार्ड और उधार, बिना GST) में से आज बिके माल की खरीद लागत घटाएँ, तो सकल लाभ मिलेगा; उसमें से किराया, सैलरी, बिजली जैसे महीने के खर्च का रोज़ का हिस्सा (महीने का खर्च ÷ 30) घटाएँ, तो आज का शुद्ध लाभ मिलेगा। गल्ले की नकदी को मुनाफ़ा न मानें, क्योंकि उसमें उधार, पुरानी वसूली और सप्लायर का भुगतान मिला होता है।
शाम को गल्ला गिनकर "आज ₹8,000 बने" कहना आसान है, पर वह नकदी है, मुनाफ़ा नहीं। रोज़ का सही प्रॉफ़िट-लॉस 5 मिनट का काम है, अगर बिक्री और हर आइटम की खरीद लागत लिखी हो। नीचे तरीका, एक उदाहरण और आम गलतियाँ हैं। महीने का पूरा हिसाब (स्टॉक के साथ) दुकान का मुनाफ़ा कैसे निकालें में है।
रोज़ का प्रॉफ़िट-लॉस: 4 लाइनें
| लाइन | कैसे निकालें | उदाहरण |
| 1. आज की बिक्री | नकद + UPI + कार्ड + उधार बिक्री, बिना GST, वापसी घटाकर | ₹25,000 |
| 2. बिके माल की लागत | आज बिके हर आइटम की मात्रा × उसका खरीद दाम | ₹19,500 |
| 3. सकल लाभ | लाइन 1 − लाइन 2 | ₹5,500 (22%) |
| 4. खर्च का रोज़ का हिस्सा | (किराया + सैलरी + बिजली + बाकी खर्च) ÷ 30 | ₹45,000 ÷ 30 = ₹1,500 |
| शुद्ध लाभ | लाइन 3 − लाइन 4 | ₹4,000 (बिक्री का 16%) |
ये आँकड़े सिर्फ़ उदाहरण हैं। अपने आँकड़े फ्री प्रॉफ़िट-लॉस कैलकुलेटर में डालें; वह शुद्ध लाभ, नेट मार्जिन और ब्रेक-ईवन बिक्री (कितनी बिक्री पर न फ़ायदा, न नुकसान) भी दिखाता है।
गल्ले की नकदी मुनाफ़ा क्यों नहीं है?
| चीज़ | गल्ले पर असर | मुनाफ़े पर असर |
| आज की उधार बिक्री | गल्ले में नहीं आई | बिक्री में गिनी जाती है |
| पुराने उधार की वसूली | गल्ले में आई | आज का मुनाफ़ा नहीं, पुरानी बिक्री का पैसा |
| सप्लायर को नकद भुगतान | गल्ले से निकला | खर्च नहीं, माल स्टॉक में है |
| बिक्री पर लिया GST | गल्ले में आया | सरकार का पैसा, मुनाफ़ा नहीं |
| UPI से आई बिक्री | गल्ले में नहीं, बैंक में | बिक्री में गिनी जाती है |
गल्ले का मिलान अलग काम है: end-of-day cash reconciliation। उधार का हिसाब: उधार खाता कैसे लिखें।
रोज़ का हिसाब कब गलत दिखता है?
- बड़ी खरीद वाला दिन: अगर बिके माल की लागत की जगह पूरी खरीद घटा दी, तो उस दिन घाटा दिखेगा। लागत सिर्फ़ बिके माल की लें।
- खरीद दाम लिखा ही नहीं: तो लागत अंदाज़ से लगेगी। हर आइटम का खरीद दाम एक बार लिख लें।
- महीने में एक बार के खर्च: किराया जिस दिन दिया उसी दिन घटाने से वह दिन घाटे में दिखेगा। हमेशा ÷ 30 वाला रोज़ का हिस्सा लें।
- चोरी या खराब माल: रोज़ के हिसाब में नहीं दिखता, महीने की गिनती में दिखता है: स्टॉक कम क्यों पड़ता है।
इसलिए रोज़ का हिसाब दिशा बताता है, और महीने का हिसाब (शुरू और आखिर के स्टॉक के साथ) असली तस्वीर। ब्रेक-ईवन विस्तार से (अंग्रेज़ी): break-even point।
कॉपी, Excel या सॉफ़्टवेयर?
| कॉपी | Excel / कैलकुलेटर | बिलिंग सॉफ़्टवेयर |
| बिके माल की लागत | हर आइटम का हाथ से जोड़ | कुल आँकड़े खुद डालने | हर बिल से अपने आप (खरीद दाम सेव हो तो) |
| गल्ले का मिलान | हाथ से | हाथ से | डे-क्लोज़ पर कैश ड्रॉअर की गिनती |
| महीने का P&L | महीने के आखिर में मेहनत | टेम्पलेट से | प्रॉफ़िट एंड लॉस रिपोर्ट |
| खर्च | कॉपी | फ्री | RichPOS: 30 दिन फ्री, फिर पहले 3 महीने ₹99/महीना, उसके बाद ₹199/महीना या ₹2,000/साल |
पूरी दुकान के हिसाब के लिए: दुकान का हिसाब किताब कैसे रखें।
आखिरी बात
रोज़ 5 मिनट का प्रॉफ़िट-लॉस हिसाब बताता है कि दुकान सही दिशा में है या नहीं। आज की बिक्री और खर्च फ्री प्रॉफ़िट-लॉस कैलकुलेटर में डालें, और हर बिल के साथ लागत और मुनाफ़ा अपने आप जानने के लिए RichPOS का 30 दिन का फ्री ट्रायल लें।
FAQ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दुकान का रोज़ का प्रॉफ़िट कैसे निकालें?
आज की बिक्री (बिना GST) में से आज बिके माल की खरीद लागत घटाएँ, फिर महीने के खर्च का रोज़ का हिस्सा (महीने का खर्च ÷ 30) घटाएँ। जो बचे वह आज का शुद्ध लाभ है।
क्या गल्ले में बची नकदी ही मुनाफ़ा है?
नहीं। गल्ले में पुराने उधार की वसूली और बिक्री पर लिया GST आता है, और सप्लायर का भुगतान निकलता है; आज की उधार और UPI बिक्री उसमें होती ही नहीं। मुनाफ़ा बिक्री और लागत से निकालें।
रोज़ के हिसाब में किराया कैसे जोड़ें?
महीने का किराया, सैलरी, बिजली और बाकी तय खर्च जोड़कर 30 से भाग दें और हर दिन वही हिस्सा घटाएँ। जिस दिन किराया दिया उसी दिन पूरा घटाने से वह दिन घाटे में दिखता है।
ब्रेक-ईवन बिक्री क्या होती है?
वह बिक्री जिस पर न फ़ायदा होता है न नुकसान: रोज़ का खर्च ÷ सकल मार्जिन। जैसे रोज़ का खर्च ₹1,500 और मार्जिन 22% हो तो लगभग ₹6,818 की बिक्री पर दुकान का खर्च निकलता है।
रोज़ का हिसाब और महीने का हिसाब अलग क्यों आते हैं?
रोज़ के हिसाब में स्टॉक की कमी, चोरी और खराब माल नहीं दिखते, और खरीद एक दिन होती है जबकि माल कई दिन बिकता है। महीने का हिसाब शुरू और आखिर के स्टॉक की गिनती से निकालें, वह ज़्यादा भरोसेमंद है।