
इस पेज पर · 7 हिस्से
- स्टॉक रजिस्टर का फ़ॉर्मेट
- उदाहरण: एक आइटम का एक हफ्ता
- स्टॉक रजिस्टर भरने के 6 नियम
- कॉपी, Excel या सॉफ्टवेयर?
- GST में स्टॉक का हिसाब ज़रूरी है?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- आखिरी बात
अपडेट: 17 अक्टूबर 2026 · लेखक: अशोक सचदेव · स्रोत: CGST अधिनियम की धारा 35 (CBIC पोर्टल)
Quick answer
स्टॉक रजिस्टर बनाने के लिए हर आइटम का अलग पेज या Excel शीट रखें, जिसमें ये कॉलम हों: तारीख, विवरण (बिल नंबर), शुरू का स्टॉक, आया माल, बिका माल, बचा स्टॉक और खरीद दाम। हर दिन का फ़ॉर्मूला है: बचा स्टॉक = शुरू का स्टॉक + आया माल − बिका माल; महीने में एक बार असली गिनती से मिलाएँ और फर्क की वजह लिखें।
स्टॉक रजिस्टर बताता है कि दुकान में कौन सा माल कितना है, कितना बिका और कब मँगाना है। GST रजिस्टर्ड दुकान के लिए स्टॉक का हिसाब रखना कानूनी ज़रूरत भी है। इस गाइड में फ़ॉर्मेट, भरने का तरीका, एक उदाहरण और आम गलतियाँ आसान भाषा में हैं।
स्टॉक रजिस्टर का फ़ॉर्मेट
| कॉलम | क्या लिखें |
| तारीख | माल आने या बिकने की तारीख |
| विवरण / बिल नंबर | सप्लायर का बिल नंबर, बिक्री का बिल नंबर या "रिटर्न" |
| शुरू का स्टॉक (ओपनिंग) | दिन या महीने की शुरुआत में मात्रा |
| आया माल (इनवर्ड) | खरीद, ग्राहक से वापसी, दूसरी ब्रांच से आया |
| बिका / गया माल (आउटवर्ड) | बिक्री, सप्लायर को वापसी, टूटा-फूटा, एक्सपायर |
| बचा स्टॉक (क्लोज़िंग) | ओपनिंग + आया − गया |
| खरीद दाम | प्रति यूनिट लागत (GST के बिना, अगर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेते हैं) |
| स्टॉक की कीमत | बचा स्टॉक × खरीद दाम |
उदाहरण: एक आइटम का एक हफ्ता
आइटम: सूरजमुखी तेल 1 लीटर पाउच। खरीद दाम ₹140 (आंकड़े सिर्फ उदाहरण हैं)।
| तारीख | विवरण | ओपनिंग | आया | गया | क्लोज़िंग |
| 1 तारीख | ओपनिंग स्टॉक | 40 | – | – | 40 |
| 2 तारीख | बिक्री (बिल 1021–1058) | 40 | – | 18 | 22 |
| 3 तारीख | खरीद, सप्लायर बिल 554 | 22 | 60 | – | 82 |
| 4 तारीख | बिक्री | 82 | – | 25 | 57 |
| 5 तारीख | लीक पाउच (नुकसान) | 57 | – | 2 | 55 |
हफ्ते के अंत में 55 पाउच × ₹140 = ₹7,700 का स्टॉक। अगर गिनती में 52 निकलें, तो 3 पाउच का फर्क लिखें और वजह ढूँढें: बिल बिना बिक्री, गलत एंट्री या चोरी।
स्टॉक रजिस्टर भरने के 6 नियम
- हर आइटम अलग: एक ही आइटम के अलग साइज़ या पैक (1 लीटर, 5 लीटर) अलग लाइन में।
- बिल से एंट्री: हर आया-गया माल किसी बिल, वापसी पर्ची या नोट से जुड़ा हो।
- नुकसान भी लिखें: टूटा, लीक, एक्सपायर माल "गया" कॉलम में, वजह के साथ।
- डिब्बा और पीस: खरीद डिब्बे में और बिक्री पीस में हो तो एक ही यूनिट (पीस) में लिखें।
- महीने में गिनती: असली गिनती से मिलाएँ। तरीका: स्टॉक ऑडिट कैसे करें (अंग्रेज़ी में)।
- दोबारा मँगाने की सीमा: हर तेज़ बिकने वाले आइटम की न्यूनतम मात्रा तय करें। देखें रीऑर्डर लेवल फ़ॉर्मूला।
कॉपी, Excel या सॉफ्टवेयर?
| तरीका | कब ठीक है | दिक्कत |
| कॉपी (रजिस्टर बुक) | 50 से कम आइटम, बहुत कम बिक्री | हर बिक्री हाथ से घटानी पड़ती है; जोड़ में गलती |
| Excel शीट | कुछ सौ आइटम, एक व्यक्ति | बिक्री अलग से डालनी पड़ती है; फ़ाइल खोने का डर |
| बिलिंग सॉफ्टवेयर | बारकोड, कई स्टाफ, सैकड़ों आइटम | शुरू में आइटम लिस्ट डालनी पड़ती है |
Excel से शुरू करना है तो फ्री स्टॉक रजिस्टर टेम्पलेट यहाँ है: फ्री Excel टेम्पलेट। बिलिंग सॉफ्टवेयर में हर बिक्री और खरीद से स्टॉक अपने आप घटता-बढ़ता है। RichPOS में हर स्टॉक बदलाव कारण और यूज़र के साथ लॉग होता है, कम स्टॉक का अलर्ट आता है, बारकोड स्कैन करके स्टॉक ऑडिट होता है, और डिब्बे से पीस की यूनिट कन्वर्ज़न रहती है। देखें स्टॉक ऑडिट सॉफ्टवेयर।
GST में स्टॉक का हिसाब ज़रूरी है?
हाँ, रजिस्टर्ड दुकान के लिए। CGST अधिनियम की धारा 35 कहती है कि रजिस्टर्ड व्यक्ति अपनी मुख्य दुकान पर माल की खरीद-बिक्री और स्टॉक का सही हिसाब रखे; यह हिसाब इलेक्ट्रॉनिक रूप में भी रखा जा सकता है। बैंक से CC लिमिट हो तो हर महीने स्टॉक स्टेटमेंट भी देना पड़ता है: स्टॉक स्टेटमेंट गाइड।
आखिरी बात
अच्छा स्टॉक रजिस्टर हर आइटम का आया, गया और बचा माल बिल के साथ दिखाता है और महीने में गिनती से मिलता है। आइटम ज़्यादा हैं तो सॉफ्टवेयर में यह अपने आप होता है। RichPOS का 30 दिन का फ्री ट्रायल शुरू करें या कीमत देखें।
FAQ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्टॉक रजिस्टर कैसे बनाएं?
हर आइटम के लिए तारीख, विवरण (बिल नंबर), शुरू का स्टॉक, आया माल, बिका माल, बचा स्टॉक और खरीद दाम के कॉलम बनाएँ। हर एंट्री बिल से जोड़ें, बचा स्टॉक = शुरू का स्टॉक + आया − गया निकालें, और महीने में असली गिनती से मिलाएँ।
स्टॉक रजिस्टर में कौन से कॉलम होते हैं?
तारीख, विवरण या बिल नंबर, ओपनिंग स्टॉक, इनवर्ड (आया माल), आउटवर्ड (बिका या गया माल), क्लोज़िंग स्टॉक, खरीद दाम और स्टॉक की कीमत।
क्लोज़िंग स्टॉक कैसे निकालें?
क्लोज़िंग स्टॉक = ओपनिंग स्टॉक + आया माल − बिका या गया माल। इसकी कीमत निकालने के लिए क्लोज़िंग मात्रा को खरीद दाम से गुणा करें।
क्या Excel में स्टॉक रजिस्टर बना सकते हैं?
हाँ। हर आइटम की एक लाइन या शीट बनाएँ और क्लोज़िंग के लिए फ़ॉर्मूला लगाएँ। RichPOS की वेबसाइट पर फ्री स्टॉक रजिस्टर Excel टेम्पलेट उपलब्ध है।
स्टॉक रजिस्टर और असली स्टॉक में फर्क क्यों आता है?
आम वजहें: बिना बिल की बिक्री, खरीद की एंट्री छूटना, गलत आइटम पर बिल, टूटा या एक्सपायर माल न लिखना, और चोरी। महीने की गिनती में फर्क लिखें और हर फर्क की वजह ढूँढें।
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ASलेखक Ashok SachdevFounder, RichPOS Software, अहमदाबाद। हम भारतीय दुकानों के लिए RichPOS बनाते हैं और ये गाइड दुकानदारों के रोज़ के सवालों से लिखते हैं। टैक्स रेट और कीमतें तारीख के साथ दी गई हैं; GST के मामलों में अपने CA से पुष्टि करें। सवाल? WhatsApp करें.
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