
इस पेज पर · 13 हिस्से
- 1. GST रजिस्ट्रेशन कब ज़रूरी है?
- 2. GSTIN दुकान के बोर्ड पर लिखना ज़रूरी है
- 3. हर बिक्री पर सही टैक्स इनवॉइस दें
- 4. ₹200 से कम की बिक्री पर छूट
- 5. HSN कोड: कितने अंक?
- 6. 22 सितंबर 2025 के नए GST रेट लगाएँ
- 7. रिटर्न समय पर भरें
- 8. इनपुट टैक्स क्रेडिट सिर्फ GSTR-2B में दिखने पर
- 9. कंपोज़िशन स्कीम: छोटी दुकान के लिए आसान रास्ता
- 10. रिकॉर्ड 72 महीने तक रखें
- RichPOS इन नियमों में कैसे मदद करता है
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- आखिरी बात
अपडेट: 17 अक्टूबर 2026 · लेखक: अशोक सचदेव · स्रोत: CGST अधिनियम की धारा 31 और 36, CGST नियम 18 और 46 (CBIC पोर्टल)
Quick answer
दुकानदार के लिए GST के मुख्य नियम: सिर्फ सामान बेचने वाली दुकान का सालाना टर्नओवर ज़्यादातर राज्यों में ₹40 लाख पार हो तो GST रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है; रजिस्ट्रेशन के बाद GSTIN दुकान के बोर्ड पर लिखना, हर बिक्री पर सही रेट और HSN के साथ टैक्स इनवॉइस देना, हर महीने GSTR-1 और GSTR-3B समय पर भरना और रिकॉर्ड 6 साल तक रखना होता है। ₹1.5 करोड़ तक टर्नओवर वाली दुकान चाहे तो कंपोज़िशन स्कीम में 1% टैक्स देकर कम काग़ज़ी काम कर सकती है।
GST के नियम बहुत लंबे हैं, पर एक आम रिटेल दुकान को रोज़ के काम में कुछ ही नियमों से वास्ता पड़ता है। नीचे वही 10 नियम आसान भाषा में हैं, हर नियम के साथ उसका कानूनी आधार, ताकि आप अपने CA से सही सवाल पूछ सकें।
1. GST रजिस्ट्रेशन कब ज़रूरी है?
| कारोबार | ज़्यादातर राज्य | तेलंगाना, पुडुचेरी | मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा |
| सिर्फ सामान (goods) | ₹40 लाख | ₹20 लाख | ₹10 लाख |
| सिर्फ सेवा या सामान + सेवा | ₹20 लाख | ₹20 लाख | ₹10 लाख |
सीमा पूरे PAN के "एग्रीगेट टर्नओवर" पर देखी जाती है, जिसमें बिना टैक्स वाली बिक्री (जैसे ताज़ी सब्ज़ी) भी गिनी जाती है। दूसरे राज्य में माल बेचने के लिए टर्नओवर कितना भी हो, रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। सीमा पार होने के 30 दिन के अंदर आवेदन करें। विस्तार से: GST रजिस्ट्रेशन लिमिट (अंग्रेज़ी में)।
2. GSTIN दुकान के बोर्ड पर लिखना ज़रूरी है
CGST नियम 18 के अनुसार हर रजिस्टर्ड व्यक्ति को अपना GSTIN दुकान के प्रवेश पर लगे नाम-बोर्ड पर लिखना है और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दुकान में साफ दिखने वाली जगह पर लगाना है। गोदाम या दूसरी ब्रांच हो तो वहाँ भी।
3. हर बिक्री पर सही टैक्स इनवॉइस दें
टैक्स इनवॉइस पर नियम 46 की जानकारी होनी चाहिए: आपका नाम, पता, GSTIN; 16 अक्षर तक का यूनिक बिल नंबर; तारीख; B2B में ग्राहक का GSTIN; HSN; आइटम, मात्रा, टैक्सेबल वैल्यू; GST रेट और रकम; और सिग्नेचर। बिना GST वाले ग्राहक को ₹50,000 या ज़्यादा का माल बेचा हो तो उसका नाम और डिलीवरी पता भी लिखें। बिल बनाने का तरीका यहाँ देखें: GST बिल कैसे बनाएं।
4. ₹200 से कम की बिक्री पर छूट
धारा 31(3)(b) के तहत ₹200 से कम की बिक्री पर अलग टैक्स इनवॉइस देना ज़रूरी नहीं, अगर ग्राहक रजिस्टर्ड नहीं है और बिल नहीं माँगता। ऐसी सारी बिक्री का दिन के अंत में एक कंसॉलिडेटेड टैक्स इनवॉइस बनाना होता है। बिलिंग सॉफ्टवेयर में हर बिक्री का बिल अपने आप बनता है, तो यह झंझट ही नहीं रहता।
5. HSN कोड: कितने अंक?
| पिछले साल का टर्नओवर | B2B बिल | B2C बिल |
| ₹5 करोड़ तक | 4 अंक ज़रूरी | वैकल्पिक |
| ₹5 करोड़ से ज़्यादा | 6 अंक ज़रूरी | 6 अंक ज़रूरी |
6. 22 सितंबर 2025 के नए GST रेट लगाएँ
22 सितंबर 2025 से ज़्यादातर सामान 5% और 18% के स्लैब में आ गया है। साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, बिस्किट, घी, नमकीन जैसी कई चीज़ें 5% पर आ गईं, कॉपी-पेंसिल 0% हो गईं, और कोल्ड ड्रिंक 40% पर गई। पुराने रेट पर बिल बनाना सबसे आम गलती है। हर आइटम का रेट HSN और GST रेट लिस्ट से एक बार मिला लें।
7. रिटर्न समय पर भरें
| रिटर्न | क्या है | मासिक तारीख |
| GSTR-1 | बिक्री की डिटेल: B2B बिल एक-एक करके, B2C कुल रकम, HSN सारांश | अगले महीने की 11 तारीख |
| GSTR-3B | सारांश: बिक्री पर टैक्स, इनपुट टैक्स क्रेडिट घटाकर बाकी टैक्स जमा | अगले महीने की 20 तारीख |
₹5 करोड़ तक टर्नओवर वाले QRMP स्कीम में तिमाही रिटर्न चुन सकते हैं, पर टैक्स हर महीने जमा होता है। देर होने पर GSTR-3B में ₹50 प्रति दिन (निल रिटर्न में ₹20) लेट फीस लगती है, टर्नओवर के हिसाब से अधिकतम सीमा के साथ, और देर से जमा टैक्स पर 18% सालाना ब्याज। देखें: GSTR-1 vs GSTR-3B और लेट फीस और ब्याज (अंग्रेज़ी में)।
8. इनपुट टैक्स क्रेडिट सिर्फ GSTR-2B में दिखने पर
खरीद पर दिया GST आप तभी घटा सकते हैं जब सप्लायर ने अपना बिल रिटर्न में डाला हो और वह आपके GSTR-2B में दिख रहा हो। इसलिए हर खरीद का बिल सँभाल कर रखें और महीने की शुरुआत में GSTR-2B से मिलान करें। पढ़ें: इनपुट टैक्स क्रेडिट।
9. कंपोज़िशन स्कीम: छोटी दुकान के लिए आसान रास्ता
| बात | कंपोज़िशन स्कीम | रेगुलर GST |
| टर्नओवर सीमा | ₹1.5 करोड़ तक (विशेष श्रेणी राज्यों में ₹75 लाख) | कोई सीमा नहीं |
| टैक्स | टर्नओवर का 1% (व्यापारी), अपनी जेब से | हर आइटम पर उसका रेट, ग्राहक से |
| बिल | बिल ऑफ सप्लाई, GST अलग नहीं | टैक्स इनवॉइस |
| इनपुट टैक्स क्रेडिट | नहीं मिलता | मिलता है |
| दूसरे राज्य में बिक्री | नहीं कर सकते | कर सकते हैं |
| रिटर्न | CMP-08 हर तिमाही, GSTR-4 साल में एक बार | GSTR-1 और GSTR-3B हर महीने या QRMP |
कंपोज़िशन वाली दुकान को बोर्ड पर "composition taxable person" लिखना होता है। विस्तार से: कंपोज़िशन स्कीम गाइड।
10. रिकॉर्ड 72 महीने तक रखें
धारा 36 के अनुसार खाते और रिकॉर्ड उस साल के वार्षिक रिटर्न की नियत तारीख से 72 महीने (6 साल) तक रखने हैं। बिल, खरीद के बिल, क्रेडिट नोट और GST रिपोर्ट का बैकअप रखें, खासकर बिलिंग सॉफ्टवेयर बदलते समय।
RichPOS इन नियमों में कैसे मदद करता है
- हर आइटम पर HSN और GST रेट एक बार सेव, फिर हर बिल पर अपने आप; A4 बिल पर HSN कॉलम।
- ग्राहक पर सेव GSTIN बिल पर छपता है; GSTR-1 रिपोर्ट में B2B, B2C और क्रेडिट नोट अलग।
- HSN के हिसाब से बिक्री और खरीद की GST रिपोर्ट, Excel, CSV या PDF में CA के लिए; Tally एक्सपोर्ट भी।
- डेटा क्लाउड में, बैकअप डाउनलोड करने की सुविधा के साथ।
RichPOS ई-इनवॉइस, ई-वे बिल नहीं बनाता और रिटर्न फाइल नहीं करता; रिटर्न आपका CA भरता है। हिंदी में पूरी जानकारी: GST बिलिंग सॉफ्टवेयर।
आखिरी बात
ज़्यादातर दुकानों के लिए GST का रोज़ का काम सही रेट, सही बिल और समय पर रिटर्न तक सीमित है। बिल और रिपोर्ट सही रहें तो CA का काम आसान और लेट फीस का डर खत्म। अपने आइटम के साथ आज़माने के लिए RichPOS का 30 दिन का फ्री ट्रायल शुरू करें (कार्ड नहीं चाहिए), या कीमत देखें। कोई भी नियम अपनी दुकान पर लागू करने से पहले अपने CA से पुष्टि करें।
FAQ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दुकान के लिए GST रजिस्ट्रेशन कब ज़रूरी है?
सिर्फ सामान बेचने वाली दुकान के लिए ज़्यादातर राज्यों में सालाना एग्रीगेट टर्नओवर ₹40 लाख पार होने पर; सेवा भी देते हैं तो ₹20 लाख पर। तेलंगाना और पुडुचेरी में सामान के लिए ₹20 लाख, और मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा में ₹10 लाख की सीमा है। दूसरे राज्य में माल बेचना हो तो टर्नओवर कुछ भी हो, रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है।
क्या दुकान के बोर्ड पर GST नंबर लिखना ज़रूरी है?
हाँ। CGST नियम 18 के अनुसार GSTIN मुख्य दुकान और हर ब्रांच के प्रवेश पर लगे नाम-बोर्ड पर लिखना है, और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दुकान में साफ दिखने वाली जगह पर लगाना है।
छोटी बिक्री पर भी GST बिल देना ज़रूरी है?
₹200 से कम की बिक्री पर, अगर ग्राहक रजिस्टर्ड नहीं है और बिल नहीं माँगता, तो अलग टैक्स इनवॉइस देना ज़रूरी नहीं (धारा 31(3)(b))। ऐसी बिक्री का दिन के अंत में एक कंसॉलिडेटेड इनवॉइस बनाना होता है।
कंपोज़िशन स्कीम में कितना टैक्स लगता है?
व्यापारी और रिटेलर टर्नओवर का 1% (0.5% CGST + 0.5% SGST) देते हैं। यह ग्राहक से नहीं लिया जाता, बिल ऑफ सप्लाई दिया जाता है और इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता। सीमा ₹1.5 करोड़ है, विशेष श्रेणी राज्यों में ₹75 लाख।
GSTR-1 और GSTR-3B कब तक भरना होता है?
मासिक फाइल करने वालों के लिए GSTR-1 अगले महीने की 11 तारीख तक और GSTR-3B 20 तारीख तक। ₹5 करोड़ तक टर्नओवर वाले QRMP में तिमाही रिटर्न चुन सकते हैं, पर टैक्स हर महीने जमा करना होता है।
GST रिकॉर्ड कितने साल रखना ज़रूरी है?
धारा 36 के अनुसार उस साल के वार्षिक रिटर्न की नियत तारीख से 72 महीने, यानी लगभग 6 साल। अपील या जाँच चल रही हो तो उससे जुड़े रिकॉर्ड उसके निपटने के एक साल बाद तक, जो भी बाद में हो।
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ASलेखक Ashok SachdevFounder, RichPOS Software, अहमदाबाद। हम भारतीय दुकानों के लिए RichPOS बनाते हैं और ये गाइड दुकानदारों के रोज़ के सवालों से लिखते हैं। टैक्स रेट और कीमतें तारीख के साथ दी गई हैं; GST के मामलों में अपने CA से पुष्टि करें। सवाल? WhatsApp करें.
RichPOS से सेकंडों में GST बिल बनाएं
बिलिंग, स्टॉक, WhatsApp बिल और GST रिपोर्ट एक ऐप में। 30 दिन फ्री ट्रायल, कार्ड नहीं चाहिए। फिर पहले 3 महीने ₹99/महीना, उसके बाद ₹199/महीना।