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GST बिल कैसे बनाएं: मोबाइल और कंप्यूटर से (2026)

GST बिल कैसे बनाएं: दुकान का GSTIN, आइटम का HSN और रेट, ग्राहक, पेमेंट, फिर प्रिंट या WhatsApp। नियम 46 के ज़रूरी फील्ड और आम गलतियाँ।

Ashok Sachdev · 8 मिनट में पढ़ें
GST बिल कैसे बनाएं: एक बार सेटअप, फिर हर बिल सेकंडों में, प्रिंट या WhatsApp
इस पेज पर · 8 हिस्से
  1. GST बिल पर क्या-क्या लिखा होना ज़रूरी है?
  2. GST बिल कैसे बनाएं: स्टेप बाय स्टेप
  3. CGST + SGST लगेगा या IGST?
  4. उदाहरण: ₹1,000 के पेन का GST बिल
  5. GST बिल बनाने में आम गलतियाँ
  6. बिलिंग सॉफ्टवेयर क्या नहीं करता
  7. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
  8. आखिरी बात

अपडेट: 17 अक्टूबर 2026 · लेखक: अशोक सचदेव · स्रोत: CGST नियम 46 (CBIC पोर्टल)

Quick answer

GST बिल बनाने के लिए बिलिंग ऐप या सॉफ्टवेयर में एक बार अपनी दुकान का नाम, पता और GSTIN डालें, हर आइटम पर उसका HSN कोड और GST रेट सेव करें, फिर हर बिल में आइटम चुनें, ग्राहक चुनें (B2B बिक्री हो तो उसका GSTIN भी) और सेव करें। सॉफ्टवेयर अपने आप CGST + SGST या IGST जोड़ देता है और बिल नंबर लगा देता है; बिल प्रिंट करें या WhatsApp पर भेज दें।

GST बिल मोबाइल से बने, कंप्यूटर से बने या हाथ से लिखी बिल बुक से, कानून के लिए फर्क नहीं पड़ता। फर्क इस बात से पड़ता है कि बिल पर CGST नियम 46 में लिखी सारी जानकारी है या नहीं। इस गाइड में आसान भाषा में बताया है कि GST बिल पर क्या-क्या होना चाहिए, उसे स्टेप बाय स्टेप कैसे बनाएँ और दुकानदार कौन सी आम गलतियाँ करते हैं।

GST बिल पर क्या-क्या लिखा होना ज़रूरी है?

जानकारीक्या लिखेंकब ज़रूरी
आपका नाम, पता, GSTINजैसा GST रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर हैहर बिल पर
बिल नंबरलगातार सीरियल नंबर, 16 अक्षर तक, एक वित्त वर्ष में दोबारा नहींहर बिल पर
बिल की तारीखबिक्री की तारीखहर बिल पर
ग्राहक का नाम, पता, GSTINग्राहक GST में रजिस्टर्ड हो (B2B)B2B बिक्री में
बिना GST वाले ग्राहक का नाम और डिलीवरी पताटैक्सेबल वैल्यू ₹50,000 या ज़्यादा हो तो ज़रूरी; उससे कम हो तो ग्राहक माँगे तबबड़ी B2C बिक्री में
HSN कोडपिछले साल टर्नओवर ₹5 करोड़ तक: B2B बिल पर 4 अंक; ₹5 करोड़ से ऊपर: हर बिल पर 6 अंकटर्नओवर के हिसाब से
आइटम का नाम, मात्राक्या बेचा और कितनाहर बिल पर
टैक्सेबल वैल्यूछूट (डिस्काउंट) घटाने के बाद की रकमहर बिल पर
GST रेट और रकमराज्य के अंदर: CGST + SGST; दूसरे राज्य में: IGSTहर बिल पर
सिग्नेचरआपका या अधिकृत व्यक्ति का सिग्नेचर या डिजिटल सिग्नेचरहर बिल पर

अगर आप कंपोज़िशन स्कीम में हैं, तो आप टैक्स इनवॉइस नहीं बल्कि "बिल ऑफ सप्लाई" बनाते हैं और उस पर GST अलग से नहीं लिखते।

GST बिल कैसे बनाएं: स्टेप बाय स्टेप

हर ऐप के मेन्यू अलग होते हैं, पर काम का क्रम एक ही है। यहाँ RichPOS का उदाहरण है, जो ब्राउज़र में और Android ऐप पर एक ही अकाउंट से चलता है।

  1. अकाउंट बनाएँ। app.richdaddy.in/register पर 30 दिन का फ्री ट्रायल शुरू करें। कार्ड नहीं चाहिए।
  2. दुकान की जानकारी डालें। दुकान का नाम, पता, फोन और GSTIN, बिलकुल वैसा जैसा GST सर्टिफिकेट पर है।
  3. आइटम जोड़ें। हर आइटम का नाम, बिक्री दाम, HSN कोड और GST रेट। आइटम ज़्यादा हैं तो Excel से इम्पोर्ट करें या बारकोड स्कैन करके जोड़ें। रेट पक्का नहीं है तो HSN और GST रेट फाइंडर में देखें।
  4. पक्के ग्राहक सेव करें। व्यापारी ग्राहकों का नाम, पता और GSTIN एक बार सेव करें। RichPOS में ग्राहक पर सेव GSTIN बिल पर अपने आप छपता है।
  5. बिल बनाएँ। बिलिंग खोलें, आइटम सर्च या स्कैन करें, मात्रा बदलें और ग्राहक चुनें। आम ग्राहक को कैश ग्राहक रहने दें।
  6. पेमेंट लें। कैश, कार्ड, UPI या इनका मिला-जुला पेमेंट एक ही बिल पर दर्ज करें। ग्राहक बाद में देगा तो बिल उसके नाम उधार में रखें।
  7. सेव करें, फिर प्रिंट या शेयर करें। थर्मल (58 या 80 mm) या A4 प्रिंटर पर प्रिंट करें, या बिल WhatsApp पर भेजें।

स्टेप 1 से 4 एक ही बार करने हैं। उसके बाद हर बिल कुछ सेकंड का काम है।

CGST + SGST लगेगा या IGST?

यह इस पर तय होता है कि माल कहाँ सप्लाई हो रहा है, न कि क्या बेच रहे हैं। दुकान पर आए ग्राहक की बिक्री आपके राज्य के अंदर है, इसलिए बिल पर CGST और SGST आधा-आधा लगता है: 18% वाले आइटम पर 9% CGST + 9% SGST। अगर माल दूसरे राज्य के ग्राहक को भेजा, तो पूरा 18% IGST लगेगा। विस्तार से पढ़ें: इंट्रा-स्टेट vs इंटर-स्टेट GST (अंग्रेज़ी में)।

उदाहरण: ₹1,000 के पेन का GST बिल

अहमदाबाद की दुकान ने अहमदाबाद के ग्राहक को ₹1,000 (GST से पहले) के बॉल पेन बेचे। पेन (HSN 9608) पर 18% GST है।

लाइनरकम
टैक्सेबल वैल्यू₹1,000.00
CGST @ 9%₹90.00
SGST @ 9%₹90.00
कुल बिल₹1,180.00

यही माल महाराष्ट्र के ग्राहक को जाता, तो बिल पर दो लाइन की जगह IGST @ 18% = ₹180 होता। हिसाब जाँचने के लिए फ्री GST कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।

GST बिल बनाने में आम गलतियाँ

  • गलत GST रेट। 22 सितंबर 2025 से बहुत सी चीज़ों के रेट बदले हैं। पुराने बिल से रेट कॉपी न करें; हर आइटम का रेट HSN से एक बार मिलाएँ। देखें HSN और GST रेट लिस्ट।
  • दो फोन पर दो अलग ऐप। दो लोग अलग-अलग फ्री ऐप से बिल बनाएँ तो बिल नंबर टकराते हैं। एक अकाउंट में हर स्टाफ का अलग लॉगिन रखें।
  • B2B बिल पर ग्राहक का GSTIN नहीं। इसके बिना ग्राहक इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले पाएगा और बिल दोबारा बनवाएगा।
  • GST सहित दाम को GST से पहले का दाम मान लेना। तय करें कि आइटम का दाम टैक्स सहित है या नहीं, और आइटम पर वैसा ही सेट करें।
  • रिटर्न पर बिल डिलीट करना। माल वापस आए तो क्रेडिट नोट बनाएँ, बिक्री डिलीट न करें।

बिलिंग सॉफ्टवेयर क्या नहीं करता

साफ बता दें: RichPOS चलाने के लिए इंटरनेट चाहिए, इसमें ऑफलाइन मोड नहीं है। यह ई-इनवॉइस (IRN) और ई-वे बिल नहीं बनाता और GST पोर्टल पर रिटर्न फाइल नहीं करता। यह आपके CA के लिए GSTR-1 सेल्स रिपोर्ट और HSN के हिसाब से GST रिपोर्ट Excel, CSV या PDF में देता है। हिंदी में पूरी जानकारी: GST बिलिंग सॉफ्टवेयर।

आखिरी बात

GST बिल किसी भी डिवाइस से बने, उस पर नियम 46 की हर जानकारी होनी चाहिए। GSTIN और आइटम के HSN एक बार सही सेट कर दें, फिर हर बिल सेकंडों में बनेगा। अपने आइटम के साथ आज़माने के लिए RichPOS का फ्री ट्रायल शुरू करें या प्लान और कीमत देखें। सवाल हो तो WhatsApp पर पूछें, हम हिंदी में जवाब देते हैं।

FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मोबाइल से बना GST बिल मान्य है?
हाँ। GST कानून में कोई डिवाइस तय नहीं है। मोबाइल ऐप से बना बिल तब मान्य टैक्स इनवॉइस है जब उस पर नियम 46 की सारी जानकारी हो: आपका नाम, पता और GSTIN, यूनिक बिल नंबर, तारीख, ज़रूरत हो तो ग्राहक की जानकारी, HSN, आइटम, मात्रा, टैक्सेबल वैल्यू, GST रेट और रकम, और सिग्नेचर या डिजिटल सिग्नेचर।
बिना GST नंबर के GST बिल बना सकते हैं?
नहीं। सिर्फ GST में रजिस्टर्ड व्यक्ति ही टैक्स इनवॉइस बनाकर GST ले सकता है। जिस दुकान का टर्नओवर रजिस्ट्रेशन की सीमा से कम है, वह बिना GST वाला सादा बिल देती है।
GST बिल पर HSN कोड ज़रूरी है?
पिछले साल का टर्नओवर ₹5 करोड़ तक है तो B2B बिल पर 4 अंक का HSN ज़रूरी है और B2C बिल पर वैकल्पिक। ₹5 करोड़ से ज़्यादा टर्नओवर पर हर टैक्स इनवॉइस पर 6 अंक का HSN ज़रूरी है।
ग्राहक का GSTIN कब लिखना ज़रूरी है?
सिर्फ तब जब ग्राहक GST में रजिस्टर्ड है (B2B बिक्री)। बिना GST वाले ग्राहक का नाम और डिलीवरी पता तब ज़रूरी है जब टैक्सेबल वैल्यू ₹50,000 या ज़्यादा हो; उससे कम पर सिर्फ ग्राहक के कहने पर।
GST बिल बनाने के लिए कौन सा ऐप अच्छा है?
ऐसा ऐप चुनें जो हर आइटम पर HSN और GST रेट रखे, बिल नंबर अपने आप लगाए, B2B बिल पर ग्राहक का GSTIN छापे, बिल WhatsApp पर भेजे और CA के लिए GSTR-1 रिपोर्ट दे। RichPOS यह सब 30 दिन फ्री ट्रायल के बाद पहले 3 महीने ₹99/महीना, फिर ₹199/महीना या ₹2,000/साल में देता है।
एक बिल नंबर दो बार इस्तेमाल हो जाए तो?
नियम 46 के अनुसार बिल नंबर एक वित्त वर्ष में यूनिक होना चाहिए। अलग-अलग काउंटर के लिए अलग सीरीज़ (जैसे A/ और B/) रख सकते हैं, पर एक ही नंबर दोबारा नहीं आना चाहिए। सॉफ्टवेयर नंबर अपने आप लगाता है, तो यह गलती नहीं होती।
आपकी दुकान के लिएGST billing software →Every GST field on the bill and GST reports by HSN for your CA.

जल्दी हिसाब चाहिए? फ्री GST कैलकुलेटर से GST जोड़ें या घटाएं।

लेखक Ashok Sachdev

Founder, RichPOS Software, अहमदाबाद। हम भारतीय दुकानों के लिए RichPOS बनाते हैं और ये गाइड दुकानदारों के रोज़ के सवालों से लिखते हैं। टैक्स रेट और कीमतें तारीख के साथ दी गई हैं; GST के मामलों में अपने CA से पुष्टि करें। सवाल? WhatsApp करें.

RichPOS से सेकंडों में GST बिल बनाएं

बिलिंग, स्टॉक, WhatsApp बिल और GST रिपोर्ट एक ऐप में। 30 दिन फ्री ट्रायल, कार्ड नहीं चाहिए। फिर पहले 3 महीने ₹99/महीना, उसके बाद ₹199/महीना।